शनिवार, 23 मई 2009

एक व्यंग : सियारिन और हुआं हुआं.....

हुआं ! हुआं ! रात के अँधेरे में कहीं दूर से आवाज़ आई
'उफ़ ,स्साले रात में भी सोने नहीं देते'-नेता जी ने करवट बदली
शयन कक्ष के बाहर सुरती ठोंकते हुए रामदीन हवलदार ने नेता जी की अस्फुट अंतर्व्यथा सुन ली.साहब की आतंरिक पीडा से मर्माहत हो गया दिन भर साहब सभाओं में 'हुआं -हुआं ' सुनते हैं अब यहाँ
फिर क्या था ! रामदीन ने यह बात पी०ए० साहब को बताई ,पी०ए० साहब ने चीफ सेक्रेटरी को,चीफ सेक्रेटरी ने पुलिस कमिश्नर को,पुलिस कमिश्नर ने डिप्टी कमिश्नर को ,डिप्टी कमिश्नर ने ...... अंत में ओ०सी० ने रामदीन हवलदार को बताया कि कल रात कुछ सियारों के 'हुआं -हुआं से नेता जी चैन से सो नहीं सो सके उन्ही से बात उठी थी ,उन्ही तक बात जा पहुँची
मीटिंग हुई निर्णय लिया गया . प्रस्ताव पास हुआ . रात्रि-काल में सियार का 'हुआं -हुआं बोलना शुभ नहीं. शान्ति व्यवस्था भंग हो सकती है-वह भी तब जब कि क्षेत्र 'नो-हार्न-ज़ोन ' घोषित हो. यह सरासर 'अफेंस' हैं,गैर कानूनी है. इस पर प्रतिबन्ध लगना चाहिए . इस समस्या पर विचार होना चाहिए.
देश में आजतक कोई कानून नहीं बना इस पर .अविलम्ब बनाना चाहिए. फ़िलहाल 'अध्यादेश' से काम चल सकता है .ऐसे असमय शोर से 'ध्वनि-प्रदूषण' की संभावना बनती है. साहब की नीद टूट सकती है .देश हित में साहब का 'सोये' रहना ही उचित है. जग जाने पर हम लोगो के धंधे-पानी पर असर पड़ सकता है.'हुआं -हुआं करना विरोधियों की साजिस भी हो सकती है. कभी 'एक्स्प्लानेद' पर 'हुआं -हुआं करते हैं ,कभी 'वोट-क्लब' पर कभी 'राम लीला' मैदान में ,कभी 'गांधी मैदान' में .अगर समय रहते उचित कार्यवाई नहीं हुई तो हो सकता है कि जो सियार 'सेन्ट्रल-पार्क' में मिल कर 'हुआं -हुआं करते थे ,कल सेंट्रल में पहुँच कर 'हुआं -हुआं करना शुरू कर दें या कौन जाने साहब के बेड के नीचे ही बैठ कर 'हुआं -हुआं करना शुरू कर दें
उक्त प्रस्ताव उचित कार्यवाई हेतु सुरक्षा इंचार्ज को प्रेषित कर दिया गया. उचित कार्यवाई का सरकारी तंत्र में बहुत व्यापक अर्थ होता है. आप चाहें तो इस निर्देश पर कुछ भी कार्यवाही कर सकते हैं, गाली देने से गोली चलाने तक.हथकडी पहनाने से डंडा चलाने तक.बाद में आप उसे उचित ठहरा दें.आप चाहें तो कुछ भी नहीं कर सकते है . बता दें उचित कार्यवाही हेतु संभावनाओं का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है.यही शासन तंत्र है.
'उचित कार्यवाही' की अनुशंसा प्राप्त होते ही ,सुरक्षा गार्डों की एक मीटिंग तय की गई. मृदु पेय की,अल्पाहार की,मीटिंग के बाद मध्यान्ह भोज की व्यवस्था की गई .जिले के बाहर से आए अधिकारियों के लिए सोम-सुरा अलग से.मीटिंग नियत तिथि व नियति समय पर अध्यक्षीय नोट के साथ प्रारम्भ हुई
'ज्ञातव्य है कि कुछ सियारों के 'हुआं -हुआं ' से साहब की नींद व शान्ति व्यवस्था भंग हुई है और हमे सुरक्षा व्यवस्था 'रिव्यू ' करने को बाध्य होना पड़ा है. आज की मीटिंग इसी हेतु बुलाई गई है.हो सकता है इसमें विदेशी शक्तियों का हाथ हो या फिर हमारे पडोसी देशों की आतंकवादी गतिविधियों का .या हमारे अंदरुनी शत्रुओं के षडयन्त्र का कोई हिस्सा हो.अगर हमने उचित समय पर कार्यवाई नहीं की तो हो सकता है कि असली सियार के 'हुआं -हुआं 'के साथ-साथ हम नकली सियार भी 'हुआं -हुआं ' करना शुरू कर दें....'
'सर! हमें उसे पकड़ लेना चाहिए . आई मीन अरेस्ट सर! '--एक युवा प्रोबेशन अधिकारी ने सुझाया
" नो स्सर! हमारे पास कोई ऐसा जेल नहीं जहाँ सियार बंद किया जा सके '-एक बुजुर्ग अधिकारी ने प्रतिवाद जताया
" सियार को अदालत में पेश कर रिमांड पर लेना मुश्किल है स्सर! कानूनी अड़चन आ सकती है "-वृध्द अधिकारी का एक सहयोगी अधिकारी ने समर्थन किया
" स्सर ! अगर अरेस्ट करने के बाद सियार फरार हो जाए तो '...बुजुर्ग अधिकारी ने शंका प्रगट करते हुए कहा '....प्रेस वाले टोपी उछाल देंगे ,बड़ी फजीहत होगी '
" नो प्रॉब्लम स्सर ,हम उसकी ज़गह दूसरा सियार पकड़ कर बंद कर देंगे सब सियार एक जैसे होते है '--प्रोबेशन युवा अधिकारी ने अपने तर्क की पुष्टि की
'सारी सर ! आदमी को डंडे से सियार तो बनाया जा सकता है मगर सियार को आदमी नहीं '-- सहयोगी अधिकारी ने प्रतिवाद किया
अध्यक्ष महोदय कोई उचित निर्णय न होता हुआ देख चिंताग्रस्त हो गए क्या ज़बाब देंगे अपने बड़े साहब को ?मुख मलिन होते देख रामदीन हवलदार ने अपना बिहारी फार्मूला बताया -
" स्सर ! आप कहें तो धर दे एकाध लउर ससुरे पर.न रहेगा बांस ,न बाजेगी बंसुरी
" नो स्सर ,यह तो हिंसा का रास्ता है गांधी जी की आत्मा को कष्ट होगा -युवा अधिकारी ने विरोध प्रगट किया
"स्सर ! गांधी बाबा तो 'राजघाट' में सोए रहे हैं वह तो अब पत्थर के होए गए है . वह तो पिछलहूँ दंगा में किछु न बोले हैं -इ त एक ठो सियार बा.-रामदीन ने अपने तर्क की पुष्टि की
अंतत: उचित कार्यवाई मिल गई निर्णय लिया गया 'आपरेशन-सियार' किया जाय अगर आपेरशन में सियार मर गया तो कहा जाएगा इनकाउंटर में उसने पुलिस बल पर हमला किया था .शासकीय सेवा में व्यवधान डाला था. शान्ति व्यवस्था में तैनात राजकीय कर्मचारियों के कार्य निष्पादन में बाधा डाला था /एकाध पिस्तौल-चाकू बरामदी में दिखा देंगे
मगर कोशिश यही रहेगी कि सांप मरे ना लाठी टूटे आपरेशन सियार कार्यान्वित हुआ
प्रेस वालों ने आदतन मुद्दा उछल दिया.प्रस्ताव सियार पर हुआ था ,मारी सियारिन गई .सियारिन गर्भवती थी पेट में बच्चा था गिर गया.अनर्थ हो गया.जगह जगह धिक्कार सभाएँ होने लगी .निंदा प्रस्ताव आने लगे.महिला संगठनों ने जुलूस निकालने की धमकी दी .घायल सियारिन कराह रही है .रह रह कर तड़प रही है .सोच रही है -हुआं हुआं तो सियार ने किया था मारी मैं गई.वह तो भाग गया ,पकडी मैं गई .बेवफा मर्द की जाति ही ऐसी होती है.इससे पहले भी तो हम हुआं हुआं करते थे तो साहब की नीद नहीं टूटती थी.जनता चालीस साल से कितना हुआं हुआं कर रही है दिल्ली की नीद नहीं टूट रही है.संसद में,विधान-सभाओं में कितना हुआं हुआं होता है सरकार चैन की नींद सोती है .तो हमी क्यों ?--घायल सियारिन मन ही मन दुखी थी.
उससे भी ज्यादा दुखी जनता.वन संरक्षण वाले,क्रुएलिटी प्रिवेंसन वाले ,पर्यावरण वाले .नुक्कड़ सभाएँ होने लगी.प्रेस में बयान आने लगे .सियारिन प्रलुप्त जाति की है ,बचाना हमारा धर्म है 'आदमी की 'आदमीयत'प्रलुप्त हो रही है कोई बात नहीं.संरक्षण सियार का करना है आदमी का नहीं .
गर्भ में बच्चों का गिर जाना वस्तुत: भयावह है .उसकी भरपाई कौन करेगा ?कौन देगा उसको सहायता राशिः?किसको देंगे अनुदान? आदमी का बच्चा गिरता तो दस-बीस हज़ार देकर मामला सुलट जाता .सियारिन का कोई नज़दीकी रिश्तेदार भी तो सामने नहीं आ रहा है .एकाध नौकरी का आश्वासन ही दे देता .विरोध प्रकाश होने लगा.आंदोलनों की धमकियाँ दी जाने लगी.
विपक्षी पार्टियाँ खुश .बिल्ली के भाग्य से सिकहर टूटा.बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया.बहुत दिनों से एक सशक्त मुद्दे की तलाश थी.शहर बंद का आह्वान किया जा सकता है . कम से कम मंत्री जी का इस्तीफा तो माँगा ही जा सकता है.नैतिक आधार पर उन्हें इस्तीफा स्वयं सौंप कर वानप्रस्थ चले जाना चाहिए .जो व्यक्ति एक सियार की सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकता ,वह देश की जनता को क्या सुरक्षा प्रदान करेगा ! नेता जी अयोग्य हैं ....मुर्दाबाद...मुर्दाबाद .
सत्ता पक्ष चिंतित.असमय सियारिन का मरना राजनीतिक संकट गहराने का अंदेशा .मादा वोट हाथ से सरक जाने का खतरा उस से भी बड़ा खतरा चुनाव आयोग वालों का... न जाने क्या अयोग्य ठहरा दें.नेता जी के राजनीतिक सलाहकारों ने सुझाव दिया---
'सर एक बयान दे दीजिए '
तैयारियां शुरू हो गई .सियारिन प्रकरण पर नेता जी अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे.पंडाल सजाने लगा.मंच बनने लगा ..पोस्टर छपने लगा,पर्चियां बटने लगी.बसों में भर-भर कर भीड़ जुटाई जाने लगी. लाउड-स्पीकर बजने लगा ,गाडियां दौड़ने लगी.सियार पर प्रदर्शिनी सेमीनार कराए जाने लगे .रेडियो टी ०वी० पर सियार संगीत उपलब्ध हो गया .'सियार-महात्म्य' बताए जाने लगे,'सियार-पुराण' सुनाए जाने लगा .चारो तरफ सियार ही सियार नज़र आने लगे.सडको पे,गलियों में,चौराहों पर........
नेता जी का 'सियार-प्रेम' देख जनता में उत्साह व ख़ुशी की लहर दौड़ गई .सब तरफ वाह! वाह! साधुवाद! साधुवाद! लाखों रुपये खर्च हो गए.
जनसभा हुई.नेता जी का भाषण आया--"मित्रो !आप जानते हैं सियार के बच्चों की ह्त्या ,विरोधियों की एक सस्ती व घिनौनी साजिस है.वह इससे राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं यह उनका षड्यंत्र है हम उन्हें सफल नहीं होने देंगे.सियार के नाम पर वह न केवल देश को अपितु हमारी 'निद्रा' की अखंडता को तोड़ना चाहते हैं.हम उन्हें नाकाम कर देंगे.हमें आप का सहयोग चाहिए....हमें एक जुटता का प्रमाण देना है ....अगर आवश्यकता पड़ी तो देशहित में हमें आज़ादी की दूसरी (?)लडाई के लिए भी तैयार रहना होगा .....
" और अंत में ,आप को जान कर ख़ुशी होगी कि जिस सियारिन के बच्चे गिर गए थे ,वह पुन: गर्भवती हो गई है "

जनसभा में तालियाँ बजने लगी

००० ००००० ००००००

-आनंद

6 टिप्‍पणियां:

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र ने कहा…

मजेदार व्यंग्य है . बधाई.

अनिल कान्त : ने कहा…

waah kya baat hai chha gaye aap to !!

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन!!

नारदमुनि ने कहा…

khub bhai khub, narayan narayan

आनन्द पाठक ने कहा…

आ०
मिश्र जी/अनिल कन्त जी/उड्न तस्तरी जी/नारद मुनि(ना०मु०)जी
उत्साह् वर्धन के लिए आप सभी लोगो क धन्यवाद

आनन्द

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

भई वाह्! बहुत ही बढिया व्यंग्य रचना.....आभार